पाठ्यक्रम:GS2/स्वास्थ्य; GS3/अर्थव्यवस्था
चर्चा में
- भारत के चिकित्सा उपकरण बाजार के वर्ष 2025 में 15.2 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2030 तक 50.1 अरब अमेरिकी डॉलर होने की संभावना है।
भारत में चिकित्सा उपकरण उद्योग
- चिकित्सा उपकरण उद्योग में नैदानिक इमेजिंग, उपभोज्य सामग्री, प्रत्यारोपण, शल्य चिकित्सा उपकरण, इन-विट्रो डायग्नोस्टिक्स (IVD), रोगी निगरानी प्रणालियाँ, आर्थोपेडिक उपकरण, हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी उपकरण तथा घरेलू स्वास्थ्य देखभाल उत्पाद शामिल हैं।
- ये सभी क्षेत्र भारत के निरंतर विस्तार करते स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वर्तमान स्थिति
- भारत का स्वास्थ्य सेवा एवं चिकित्सा प्रौद्योगिकी (MedTech) क्षेत्र उच्च विकास क्षमता वाले उदीयमान क्षेत्र (Sunrise Sector) के रूप में पहचाना जाता है।
- भारतीय चिकित्सा उपकरण क्षेत्र का वर्तमान आकार लगभग 14 अरब अमेरिकी डॉलर अनुमानित है तथा इसके वर्ष 2030 तक बढ़कर 30 अरब अमेरिकी डॉलर होने की अपेक्षा है।
- भारत, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया के बाद एशिया का चौथा सबसे बड़ा चिकित्सा उपकरण बाजार है तथा विश्व के शीर्ष 20 चिकित्सा उपकरण बाजारों में शामिल है।
- भारत से चिकित्सा उपकरणों का निर्यात भी 4 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर को पार कर चुका है, जिससे देश चिकित्सा प्रौद्योगिकी विनिर्माण क्षेत्र में एक वैश्विक अग्रणी के रूप में उभर रहा है।
भारत में MedTech क्षेत्र की वृद्धि को प्रेरित करने वाले कारक
- प्रौद्योगिकी को अपनाना एवं अवसंरचना का निर्माण: अस्पतालों, नैदानिक केंद्रों, पहनने योग्य उपकरणों तथा उन्नत नैदानिक सुविधाओं के तीव्र विस्तार से देशभर में चिकित्सा प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग बढ़ रहा है।
- स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग: बढ़ती प्रयोज्य आय, स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता तथा स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यक्तियों द्वारा किए जाने वाले व्यय में वृद्धि से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच व्यापक हो रही है और घरेलू बाजार का विस्तार हो रहा है।
- कम लागत पर कुशल विनिर्माण: भारत को लागत के क्षेत्र में महत्वपूर्ण लाभ तथा अत्यधिक कुशल कार्यबल प्राप्त है। कोविड-19 महामारी के दौरान विनिर्माण क्षेत्र द्वारा तीव्र गति से उत्पादन बढ़ाने की क्षमता ने इस प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को प्रदर्शित किया।
- गतिशील स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र: 250 से अधिक MedTech कंपनियाँ सुलभ एवं स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप स्वास्थ्य समाधान विकसित करने और नवाचार को बढ़ावा देने में योगदान दे रही हैं।
- डिजिटल कनेक्टिविटी: मोबाइल फोन की उच्च पहुँच तथा बेहतर इंटरनेट अवसंरचना डिजिटल स्वास्थ्य मंचों और MedTech समाधानों के उपयोग को तीव्र गति प्रदान कर रही है।
- चिकित्सा पर्यटन बाजार: भारत में आगामी पीढ़ी की चिकित्सा प्रौद्योगिकियों की मांग सुदृढ़ बनी हुई है। वर्ष 2019 से 2024 के बीच 210 देशों से 23.6 लाख विदेशी रोगियों ने भारत का दौरा किया।
- रणनीतिक नीतियाँ एवं निवेश: उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ, वेंचर कैपिटल वित्तपोषण तथा बढ़ती निर्यात गतिविधियाँ सरकार की विभिन्न पहलों के साथ मिलकर इस क्षेत्र की दीर्घकालिक वृद्धि को गति प्रदान कर रही हैं।
महत्व
- स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग: तीव्र शहरीकरण, वृद्ध होती जनसंख्या तथा मधुमेह और हृदय रोग जैसी गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) के बढ़ते प्रसार से नैदानिक एवं उपचारात्मक उपकरणों की मांग निरंतर बढ़ रही है।
- प्रतिस्पर्धात्मकता: भारतीय विनिर्माता कम लागत वाले उत्पादन पर बल देकर दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के बाजारों में उपकरणों का निर्यात कर रहे हैं। इससे भारत उभरते वैश्विक बाजारों में “पहुँच-आधारित नवोन्मेषक” (Access-led Innovator) के रूप में अपनी स्थिति सुदृढ़ कर रहा है।
- डिजिटल स्वास्थ्य का एकीकरण: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और टेलीमेडिसिन के साथ भौतिक चिकित्सा उपकरणों का एकीकरण किया जा रहा है, जिससे दूरस्थ रोगी निगरानी, पूर्वानुमानात्मक निदान तथा डिजिटल स्वास्थ्य सेवा वितरण मॉडल को सक्षम बनाया जा रहा है।
- आयात प्रतिस्थापन की संभावना: इससे घरेलू उत्पादकों के लिए व्यापक आर्थिक संभावनाएँ उत्पन्न हुई हैं। उच्च-प्रौद्योगिकी वाले आयातों के स्थान पर घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने से आपूर्ति शृंखला अधिक सुदृढ़ और लचीली बन सकती है तथा घरेलू विनिर्माण क्षमता में वृद्धि हो सकती है।
- सुलभता एवं वहनीयता: हैंडहेल्ड अल्ट्रासाउंड प्रोब, पॉइंट-ऑफ-केयर परीक्षण किट तथा पोर्टेबल ECG उपकरणों जैसी तकनीकी प्रगति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण क्लीनिकों को महंगे बुनियादी ढाँचे के बिना समय पर उपचार उपलब्ध कराने में सक्षम बना रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अधिक लोकतांत्रिक एवं समावेशी हो रही है।
मुद्दे एवं चिंताएँ
- उच्च आयात निर्भरता: देश अभी भी वैश्विक आपूर्ति संबंधी व्यवधानों के प्रति संवेदनशील है। MRI स्कैनर, CT प्रणालियाँ तथा उन्नत कैंसर उपचार उपकरणों सहित उच्च-स्तरीय उपकरणों का अभी भी बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है।
- अधिकांश घरेलू उत्पादन अभी भी मूलभूत उपभोज्य सामग्री, डिस्पोजेबल उपकरणों अथवा अंतिम असेंबली तक केंद्रित है, जबकि महत्वपूर्ण घटकों और उप-प्रणालियों का आयात अभी भी विदेशी बाजारों से किया जाता है।
- लागत एवं पूंजी संबंधी बाधाएँ: उन्नत प्रौद्योगिकी-आधारित चिकित्सा उपकरणों का विकास एक पूंजी-गहन प्रक्रिया है। इसमें व्यापक नैदानिक सत्यापन, लंबी परीक्षण अवधि तथा जटिल बहु-स्तरीय परीक्षण शामिल होते हैं, जो प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप और MSME के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
- जटिल नियामक वातावरण: जोखिम-आधारित वर्गीकरण प्रक्रिया, गुणवत्ता अनुपालन संबंधी मानदंड तथा राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के प्राधिकरणों से आवश्यक अनुमोदनों में दोहराव के कारण उत्पादों को बाजार में लाने में अधिक समय लग सकता है।
- भारत ने अभी तक पूर्ण नियामक मानदंड जारी नहीं किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप लगभग ₹1,500 करोड़ का बाजार अत्यंत सीमा तक अनियंत्रित बना हुआ है।
- कुशल मानव संसाधन की कमी: योग्य जैव-चिकित्सा इंजीनियरों, नैदानिक परीक्षण प्रबंधकों तथा नियामक अनुपालन विशेषज्ञों की कमी तीव्र विस्तार और प्रौद्योगिकी नवाचार में बाधा उत्पन्न कर रही है।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
- चिकित्सा उपकरणों के लिए PLI योजना: विकिरण, इमेजिंग, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर और प्रत्यारोपण जैसे क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए ₹3,420 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह योजना वित्त वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक लागू है।
- मेडिकल डिवाइस पार्क योजना: विश्वस्तरीय साझा अवसंरचना उपलब्ध कराने तथा पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं के माध्यम से उत्पादन लागत को कम करने के उद्देश्य से यह योजना लागू की गई है। केंद्र सरकार की ₹300 करोड़ की सहायता से उज्जैन, कांचीपुरम और ग्रेटर नोएडा में तीन मेडिकल डिवाइस पार्क विकसित किए जा रहे हैं।
- चिकित्सा उपकरण उद्योग सुदृढ़ीकरण योजना (2024): ₹500 करोड़ के निवेश के साथ यह योजना महत्वपूर्ण घटकों के विनिर्माण, कौशल विकास, नैदानिक अनुसंधान, साझा अवसंरचना तथा उद्योग संवर्धन को प्रोत्साहित करती है। इससे व्यापक MedTech पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने में सहायता मिलती है।
निष्कर्ष
- भारत का MedTech उद्योग उपभोक्ता-आधारित बाजार से आगे बढ़कर एक आत्मनिर्भर नवाचार एवं विनिर्माण केंद्र के रूप में परिवर्तित हो रहा है।
- विशाल घरेलू बाजार, कुशल मानव संसाधन, लागत संबंधी प्रतिस्पर्धात्मक लाभ तथा तीव्रता से विकसित होती स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना भारत के लिए वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करते हैं।
- सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत, अस्पतालों और स्टार्टअप के बीच समन्वित पारिस्थितिकी तंत्र भारत को केवल असेंबली-आधारित गतिविधियों से आगे बढ़ाकर स्वदेशी नवाचार, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता तथा किफायती चिकित्सा समाधान विकसित करने में सक्षम बना सकता है। इससे आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने में भी सहायता मिलेगी।
Source :BS